Small children story in Hindi

By | April 27, 2019

Small children story in Hindi मां की अंतिम इच्छा

Small children story in Hindi – सुंदरपुर गांव में चार भाई रहा करते थे उनके पिता और उनके माता किसान थे वह दोनों लोग खेतों में दिनभर काम किया करते थे चारों भाई अपने माता पिता की हाथ बढ़ाने में उनकी मदद करते थे पहले का नाम रोशन दूसरे का नाम राजू  तीसरे का नाम पप्पू और चौथे का नाम मोतीलाल था चारों की आपस में कभी भी नहीं बनती थी वह अक्सर किसी ना किसी बात पर झगड़ते रहा करते थे जिसे देख कर उनके माता पिता अक्सर चिंतित रहा करते थे

एक दिन बूढ़े किसान की मृत्यु हो गई जिसकी वजह से अब घर का सारा कार्य भार मोती लाल की माता पर आ पड़ा और वह परेशान रहने लगी वह रोज खेतों में काम करती और साथ ही साथ अपने सारे बच्चों का भरण पोषण भी करती कुछ समय बीतता गया और चारों भाई बड़े हो गए एक दिन उनकी मां बीमार पड़ गई और उसने उन चारों को बुलाया और बोला कि बेटा मेरी अंतिम इच्छा यही है कि तुम चारों एक साथ रहो एक घर में मेरे मरने के बाद भी

उसकी इस बात को सुनकर सब के सब चुप रहे मां ने फिर से यह बात दोहराया जिसको सुनकर के रोशन ने बोला ठीक है मां, ऐसे कुछ दिन चला और उसके बाद उनकी मां भी दुनिया छोड़कर चल बसी सब ने मिल कर के अपनी मां का ब्रह्मभोज किया और उसके बाद से रोशन ने बोला की भाइयों मैं चाहता हूं कि मां जैसा चाहती थी वैसा हम सभी मिलकर एक साथ रहे उसकी इस बात को सुनकर के सभी गुस्सागए और बोले कि यह भूल कर के भी मत सोचना कि मैं तुम लोगों के साथ रहूंगा ऐसा ही सब ने एक दूसरे को देखते हुए बोला और सब अगले ही दिन जो भी जमा पूंजी थी उसे आपस में बांट कर अलग अलग हो गए

उसके बाद सभी ने अपने लिए एक एक घर बनाने का निश्चय किया जो सबसे बड़ा था उसने अपने पैसों से पक्का घर बनाने की सारी चीजें खरीदना शुरू किया लेकिन बीच में ही उसके पैसे खत्म हो गए जिसकी वजह से वह और अधिक मेहनत करने लगा मजदूरी करने लगा और पैसे इकट्ठा करके सामान को खरीदने लगा वहीं पर दूसरे भाइयों ने घास और बांस की घर बनाना शुरू कर दी कुछ दिन में उनका घर तैयार हो गया और वह हंसी-खुशी से रहने लगे

लेकिन रोशन का घर अभी भी पूरा नहीं हुआ था कुछ समय बाद रोशन ने भी मेहनत करके अपना घर पूरी तरह से बना लिया और यह भी अच्छे से रहने लगा एक दिन रात को अचानक बहुत ही तेज तूफान आया और जितने भी कमजोर पेड़ थे और घास फूस के घर थे उन्हें उड़ा ले गया जिसकी वजह से तीनों भाई बेघर हो गए और वह बड़े भाई रोशन के घर आए और जब वह उसके घर आए तो उन्होंने देखा कि उसके घर को कुछ नहीं हुआ है वह जैसा था वैसे ही हैं उन्होंने दरवाजा खटखटाया रोशन बाहर आया उसने अपने भाइयों को उस दशा में देखकर अंदर आने के लिए कहा अब तीनों भाइयों को अपनी गलती का एहसास हो गया था और पश्चाताप के आंसू बहा रहे थे

रोशन बड़ा भाई होने के नाते उन तीनों को अपने घर में रहने के लिए जगह दे दिया और बोला कि हम सब पहले के जैसे एक घर में रह सकते हैं अगर आप लोग चाहो तो सब हंसी खुशी से राजी हो गए और हंसी खुशी से रहने लगे और सब मिलकर खेती-बाड़ी किसानी करने लगे और इस तरह से उस बूढ़ी मां का भी सपना पूरा हो गया

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