Any moral story in Hindi

By | April 17, 2019

Any moral story in Hindi जादुई चादर

Any moral story in Hindi – एक समय की बात है एक गांव में एक बहुत ही अमीर व्यक्ति रहता था जिसका नाम रविशंकर था उसकी एक पत्नी थी जिसका नाम निर्मला था रवी शंकर अमीर तो बहुत था लेकिन साथ ही साथ बहुत ही कंजूस और क्रूर किसम का आदमी था वह किसी की सहायता नहीं करता था अगर कोई व्यक्ति या कोई किसान उसके पास पैसे मांगने के लिए या किसी सहायता के लिए आता तो उसे किसी ना किसी बात में फंसा कर के उन्हें मना कर देता था जबकि निर्मला चोरी चुपके हर एक की मदद किया करती थी

वह हमेशा सोचती रहती थी कि काश कोई ऐसी तरकीब मिल जाए जिसको अपना करके वह अपने पति को अच्छा बना सके एक दिन जब निर्मला दिन में अकेले घर पर कार्य कर रही थी और रवि शंकर अपनी दुकान पर गया हुआ था तभी एक साधु महात्मा आए और उन्होंने दरवाजा खटखटाया निर्मला बाहर निकली और साधु महात्मा को प्रणाम किया और उन्हें अंदर आने के लिए कहा साधु महात्मा अंदर आए और उन्होंने बोला कि मैं पिछले 1 हफ्ते से भूखा हूं अगर तुम मेरी भूख शांत कर दो तो बहुत कृपा होगी

निर्मला तुरंत अपनी रसोई में गइ और वहां से भोजन लाकर के साधु महात्मा को दे दिया साधु महात्मा भोजन करने के बाद बहुत ही खुश हुए और उन्होंने निर्मला से कुछ मांगने के लिए कहा निर्मला ने बोला की हे महात्मा मेरे पास सब कुछ है ईश्वर ने मुझे सब कुछ दिया हुआ है मुझे किसी चीज की कमी नहीं है कमी है तो बस एक चीज की मेरे पति बहुत ही स्वार्थी हैं और मैं  चाहती हु.कि वह सब की मदद करें और दयावान और ईमानदार व्यक्तियों की तरह रहे

इस बात को सुनकर के महात्मा ने बोला कोई बात नहीं यह चादर लो यह कोई ऐसी वैसी चादर नहीं है यह एक जादुई चादर है जब खाना खा करके सोने को जाना तो यह चादर अपने पति को दे देना शाम को जब रवि शंकर घर वापस आया और खाना खाने के बाद जब दोनों सोने के लिए गए तब उसकी पत्नी निर्मला ने रविशंकर को वह चादर दिया और उस साधु महात्मा के बारे में बताया और बोली कि अगर आप इस चादर को ओढ़ करके सोएंगे तो आप और अधिक अमीर होते जाएंगे

इस बात को सुनकर के रवि शंकर तुरंत चादर लेकर ओढ़ कर सो गया जब वह सोया तो उसने देखा कि वह एक बहुत ही घने जंगल में खड़ा है वहां पर दूर-दूर तक कोई भी व्यक्ति नहीं दिख रहा है तभी एक बूढ़ा व्यक्ति वहां पर दिखाई दिया जब रविशंकर उस बूढ़े व्यक्ति के पास गया तो उसने पास ही में दो गुफा देखा वह गुफा को देख कर के बूढ़े व्यक्ति से बोला कि मैं कहां पर हूं और यह कैसी गुफा है तब उस बूढ़े व्यक्ति ने रविशंकर को बताया कि यह वह गुफा है जहां पर मरने के बाद आदमी अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल पाता है अगर तुम चाहो तो अंदर जा कर के देख सकते हो

रविशंकर झट से अंदर गया जब वह अंदर गया तो उसने देखा कि बहुत सारे लोग बुरे हालत में दुबले पतले दिख रहे हैं जबकि उनके सामने बहुत सारे पकवान पड़े हुए थे उसके बाद से रविशंकर दूसरी गुफा में गया और वहां पर भी सब कुछ वैसा ही था पहली गुफा के जैसे लेकिन वहां पर सभी व्यक्ति खुश और स्वस्थ दिख रहे थे तब उसने उस बूढ़े व्यक्ति से पूछा कि ऐसा क्यों है उस बूढ़े व्यक्ति ने रविशंकर को जवाब देखते हुए कहा कि तुमने जिन कमजोर लोगों को देखा वह कमजोर इसलिए हैं क्योंकि इन दोनों गुफाओं का एक बहुत ही पुराना नियम है कि कोई भी व्यक्ति भोजन को खुद नहीं खा सकता

जिसकी वजह से वह सभी लोग कमजोर और दुखी दिख रहे थे और दूसरे में तुमने खुश और स्वस्थ लोगों को इसलिए देखा क्योंकि वह लोग एक दूसरे को खाना खिला रहे थे और स्वस्थ थे और साथ ही साथ खुश भी थे क्योंकि इस गुफा का यह शर्त है कि इंसान किसी भी खाद्य पदार्थ को खुद नहीं खा सकता लेकिन दूसरे को खिला सकता है इसलिए वह एक दूसरे को खिला रहे हैं एक दूसरे के बारे में सोच रहे हैं इसलिए वह खुश और प्रसन्न है जबकि पहले वाली गुफा में सब अपने बारे में ही सोच रहे हैं

इसकी वजह से वह सब लोग दुखी और कमजोर हैं इस बात को सुनकर के रविशंकर को समझ आ गया कि वह अपनी जिंदगी में कितना कुछ गलत कर चुका था और करता ही जा रहा था तभी उसकी नींद टूट गई और वह अपनी पत्नी को सारी बात बताया और उसने अगले दिन से ही सबकी मदद करना शुरू कर दिया और हंसी खुशी से अपना जीवन जीने लगा

Moral – Any moral story in Hindi

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें केवल अपने बारे में ही नहीं सोचना चाहिए हमें अपने साथ के लोगों अपने सगे संबंधियों को तथा अपने मित्रों के बारे में भी सोचना चाहिए क्योंकि अगर हम अपने बारे में सोचते हैं तो हम स्वार्थी बन जाते हैं और समय पड़ने पर कोई भी हमारी सहायता नहीं करता है परंतु अगर हम एक दूसरे की सहायता करते हैं तो विषम परिस्थिति में हमारे साथ देने के लिए बहुत सारे हमारे दोस्त खड़े हो जाते हैं

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